Tuesday, September 13, 2011

उसने दिन रात

उसने दिन रात मुझको सताया इतना
कि नफ़रत भी हो गयी और मोहब्बत भी हो गयी|

उसने इस नज़ाकत से मेरे होंठों को चूमा,
कि रोज़ा भी न टूटा और इफ़तारी भी हो गयी|

उसने इस तरह से मुझसे मोहब्बत की
के गुनाह भी न हुआ और इबादत भी हो गयी|

मतपूछो उसके मोहब्बत करने का अन्दाज़ कैसा था,
उसने इस शिद्दत से सीने से लगाया
कि मौत भी न हुई और जन्नत भी मिल गयी!

- अनजान

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