Wednesday, October 30, 2013

Morning Raga

गुलाबी ठंड की दस्तक

सुबह सुबह रोम रोम में हरारत सी लगी,
कुछ सिहरन सी, कुछ ठिठुरन भी
खिड़की पर गुलाबी ठंड की दस्तक सुन
पलकें मूँदे ही उठ बैठी मैं, करती कुनकुन
चढ़ा था बुख़ार माथे पर गुमान की तरह
गले में ख़राश थी या ख़लिश थी कोई
नामालूम अदा थी सर्दी की या पहेली कोई
बहरहाल उठना था टूटते बदन को समेटे
मन हुआ कोई सोने को कहदे शाॅल लपेटे
थपकी देकर मन को समझाया मनाया
फ़िर हौले से इक बोसा ख़ुद को ही देकर
चल पड़ी करने नये दिन का इस्तक़बाल

- रचना २९ अक्टूबर २०१३

कबूतर

उस कबूतर ने तुम्हारी खिड़की पर घौंसला नहीं बनाया है,

दरअसल तुम्हारी इमारत जहां है,वहाँ कभी उसका पेड़ था ..!!

#Gulzar

मेरी नज़्म पे जो मचल रहा

मेरी नज़्म पे जो मचल रहा वो हाशिया कोई और है
जो वक़्त की करवट बदल रहा वो वाक़िया कोई और है
मेरी ज़ुबां से निकल पड़ी ये बात तेरे दिल की है
जो ग़ज़ल के भीतर सँभल रहा वो क़ाफ़िया कोई और है
- रचना २८ अक्टूबर २०१३

Friday, June 8, 2012

अब क्या बचा है मेरे ज़हन में

गौर फ़र्माइएगा 

अब क्या बचा है मेरे ज़हन में तेरे ज़िक्र के अलावा 
पनपता नहीं दिल में कुछ तेरी फ़िक्र के अलावा
शादमानी इस्त्क्बाली भटक गयी रहगुज़र में
उबलता नहीं दिल में अब मेरे सब्र के अलावा 

- "मुश्ताक"

Wednesday, June 6, 2012

Gulmohar

Amidst a deaf and mute audience
the gulmohar sparkles like a rockstar

- Gulmohar

Nature is God

Mildly diabetic skin bruises
cure fastest with sunlight,
vexing prickly heat
gets exorcised by a bath in the first rain.

Nature is God.

 - Max

ફૂલૉની દશા


અત્તર નિચોવી કોણ પછી ફૂલૉની દશા ને પૂછે છે
સંજોગ ઝુકાવે ચે નહીતર અહિં કોણ ખુદા ને પૂછે છે

- કૈલાશ પન્ડિત