Friday, December 3, 2010

काँटों की सेज है

काँटों की सेज है, कुछ तो बिछाना होगा,
आँखों की टेक है, कुछ तो मिटाना होगा,
अल्फाज़ का ज़खिरा, कारोबार का झमेला,
फूलों की खेप है, कुछ तो उगाना होगा|

- मुश्ताक़

गुल्ली डन्डा सा खेल नहीं

गुल्ली डन्डा सा खेल नहीं दिल लगाना,
ना कोई मज़ाक है ज़हन में बस जाना,
चल दिए आप तो यूँ दामन झटक कर,
फूल क्या जाने काँटों में फस जाना!

- मुश्ताक़

ज़माना देखे और

ज़माना देखे और दर्द-ए-दिल निचोड़ कर रख दूँ,
बहा ना ख़ून-ए-जिगर, रह गए हम महरूम,
हर पहलू पे अन्धी ज़ीस्त है सरमुख़्तियार,
हो गए बदगुमान जब होना था मशहूर|

- मुश्ताक़

Saturday, November 6, 2010

કાચના ફૂલશી મૃદુતાજ

કાચના ફૂલશી મૃદુતાજ જુઓ છો મારા ચેહરા માં?
તમે શૂં જાનૂં કેતકેતલી ભટ્ટિયોએ ઑગાલ્યો છે મને?

- મુશ્તાક

Do you only see the delicacy
of glass flowers in my face?
How would you know how many
furnaces have refined me?

- Max

ख़ुशी के आरज़ू में

ख़ुशी के आरज़ू में मुक़द्दर सो गए,
आन्धी ऐसी चली के अपने भी क्हॊ गए,
क्या ख़ूब था उनका अन्दाज़ ए मोहब्बत,
प्यार देने आए थे और पल्कों भिगो गए

- अज्ञात

Friday, November 5, 2010

એક પંખી આવી

એક પંખી આવી ટહુકી ગયૂ,
પંખર ને વસન્ત મા ફેરવી ગયૂ

- મિત્રા પટેલ

A bird came and made a sweet call,
thus converting autumn to spring.

- translation by Max

Incomplete riffs

मिलना और बिछड़ना,
खिलना और बिखरना,
हँसना और निखरना,
फूलना और सँवरना,
मक़सदी हयात गर्च

*

जी और क्या होगा,
उगना और उभरना,
उड़ना और उमटना...

*

वह याराना जिसमें तलब-ए-वस्ल* ना हो,
एक शानदार दस्तरक़्वान** है,
जहाँ सिर्फ़ तस्वीरें परोसी गईं हो
*craving for a tryst
** tablespread